अमेरिका की चाल से तालीबांन का dushaman बना पाकिस्तान


 रायपुर,shashwatswar दूसरी वर्ल्ड वॉर के बाद दुनिया में दो महाशक्तियां थीं. एक था अमेरिका और दूसरा था रूस की अगुवाई वाला सोवियत संघ. सोवियत संघ एक बड़ा कम्युनिस्ट देश था. अफगानिस्तान उसके बॉर्डर पर था तो वहां वो अपनी साइड की सरकार चाहता था ताकि वहां अमेरिका ना आए लेकिन अफगानिस्तान में जो कम्युनिस्ट थे उनके खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथी गुट लड़ते रहते थे. माना जाता है ये सब अमेरिका करवाता रहता था. 1979 में सोवियत संघ ने अफगानिस्तान में सेना भेज कर एक तरह से इस देश पर कब्जा ही कर लिया. अमेरिका ने इस कब्जे के खिलाफ लड़ने वाले लड़ाकों का समर्थन किया और उसमें पाकिस्तान ने भी मदद की.